Vayam honored with Keshavsrushti award!

Milind dada’s speech delineating  Vayam’s thought is reproduced here. -rasika

केशवसृष्‍टी पुरस्‍कार यह एक अतिविशिष्‍ट सम्‍मान है. युवावस्‍था में जब सम्‍मान से बल मिलता है, तभी सम्‍मान होना चाहिए. जब नया कुछ करने का बल बचता नही तब किसी पीर पर सम्‍मान की चादरें चढाने से शायद ही समाज का लाभ होता है. हमारे वयम् अभियान का आज आप ने सम्‍मान किया है, वयम् की उम्र मात्र सात वर्ष हैं. मेरे थोडे बाल यहां वहां पक गए है, लेकिन मेरी उम्र यहां मायने नही रखती. यह सम्‍मान हमारे रामदास का है. (रामदास जरा खडे हो जाओ भाई, सब देखें तो सही). रामदास एक बहुत ही छोटे गांव में रहते हैं. अबतक न बिजली है, न सडक है. आप के गांव में राशन नही मिलता था. राशन लेने पहाड चढकर दुकान में जाओ, तो दुकानदार दादागिरी करता था. रामदास ने वयम् के शिबिर में कानून  को समझा, तरकीब समझी. और तहसिलदार के यहां लिखित शिकायत दर्ज की. तहसिलदार हिल गया. दुकानदार हिल गया. रामदास से बोला, भाई चूप कर, तुझे डबल राशन मुफ्त में दे देता हूँ. रामदास नही माना. आखिरकार राशन दुकानदार को पहाड उतरकर नीचे आना पडा, पूरे गांव से माफी मांगनी पडी, और पिछले छः माह का राशन बॅकलॉग भर के देना पडा. रामदास की हिंमत का आज सम्‍मान हो रहा है. यह सम्‍मान हमारे बाबल्‍या काका का है. आप का एक गांव है, जो टिंबर माफिया की दादागिरी से जूझकर अपना जंगल बचा रहा है. टिंबर चोरों ने आजूबाजू को गांवों को इन के खिलाफ भडकाया था. माहौल ऐसा था, कि इन के गांव में बैठक लेकर हम देर रात जब निकलते थे, तो इन का आधे घंटे में फोन आता था – दादा ठीक से पहुंच तो गए ना. हाल ही में आप के गांव का जंगल पर मालिकाना हक शासन ने मान्‍य किया है. 150 हेक्‍टर जंगल के मालिक बने है आप के ग्रामवासी. जंगल में कुल्‍हाडी बंद है, चराई भी एक हिस्‍से में बंद है. गांव मे सुधारित चुल्‍हे है, पचास फीसदी लकडी कम लगती है. जंगल को फेन्सिंग् बनाने के लिए सायबेज आशा ट्रस्ट ने इन की ग्रामसभा को छः लाख रूपये की मदद दी है. वयम् के सालाना बजेट से इन का बजेट जादा है.   यह सम्‍मान हमारे सलीम और शिवा का है. आप के गांव से सभी पुरूष काम की तलाश में हर साल गांव छोड कर बाहर जाते थे. यह युवक वयम् की शिबिर में आकर रोजगार गारंटी कानून सीखकर गए. नोकरशाही की हर तरकीब को मात देकर अपने गांव के लिए रोजगार उपलब्‍ध कराने में आप को सफलता मिली. 100 परिवारोंको लगातार 125 दिन अपने ही गांव में मजदुरी काम मिला. पूरी गर्मी में एक भी परिवार गांव छोडकर नही गया. हम कई बार शहर के मित्रों को हमारा इम्‍पॅक्‍ट पैसे की भाषा में समझाने के लिए इन का उदाहरण देते है. इन युवकों ने वयम् के शिबिर में शुल्‍क के रूप में चालीस रूपिये इन्‍ह्वेस्‍ट किए थे और उस का return-on-investment 100 परिवारों को मिलकर इक्‍कीस लाख रूपये का रोजगार मिला. हमारे यह जादूगर चालीस रूपये को इक्‍कीस लाख में बदलने की ताकत रखते हैं. इसी ताकत का आज सम्‍मान हो रहा है.   यह सम्‍मान हमारे सोमाकाका और विनायक का है. एक महाकाय बांध में विस्‍थापित होने से डुबने से बचाया है इन्‍हों ने छब्‍बीस गांवों को. आप मुंबईकर नही जानते की आप के नाम पर सरकार क्‍या क्‍या कर लेती है. कहते है कि मुंबई की आबादी 2025 में बहुत बढेगी, और तब पानी भी हर व्‍यक्‍ती को आज से दुगना लगेगा. अब पता नही नहाने के लिए दुगना लगेगा, या और कुछ धोने के लिए दुगना लगेगा. खैर सरकार को ऐसा लगता है कि 12 नये बडे बांध बनाए बिना यह समस्‍या नही छूटेगी. 2007 से मुंबई में हर नई ईमारत पर rainwater harvesting करना अनिवार्य है. इस का पालन मुंबई नही करती. मुंबई के कमिशनर आजतक हमें RTI में यह बता नही पाये है कि कितने लिटर पानी मुंबई की छतोंपर संवारा जाता है. क्‍यों? कॉट्रॅक्‍टरों और मंत्री संत्रीयों को जिस से पैसा मिलता है वही विकास होता है. कहते हैं, all development is byproduct of corruption! इस लिए यह सब rainwater harvesting वगैरह फालतू चीजों को छोड कर रिव्‍हर लिंक अर्थात् नदी जोड करने में सरकार आप का पैसा बरबाद करने पर तुली है. और ये नदीजोड वाले बांध बनेंगे तो सोमाकाका, विनायक, और इनमे से कईयों के गांव डुबेंगे, खेत और जंगल भी नष्‍ट हो जायेंगे. जिन को खेती के सिवा दुसरा कौशल नही है, जिनका पेटपानी जंगल की चीजों पर चलता है, उन्‍हे कितना भी पैसा दोगे तो बिना जमीन के पेट कैसे पालेंगे? इसीलिए पेसा कानून कहता है कि ग्रामसभा को पूछे बिना कोई भी जमीन सरकार नही हडप सकती. भूमि अधिग्रहण कानून (धारा 41) कहता है कि जब भी दुसरा कोई पर्याय है तब अनुसूचित या आदिवासी क्षेत्र की जमीन का अधिग्रहण नही किया जाएगा. बस् इसी कानून का प्रयोग कर इन गांव के लोगों ने बांध को रोक रखा है. कुछ लोग कहते हैं, हम विकास का विरोध करते हैं. हमारे एक कार्यकर्ता बोपजी कहते है, मुंबई वालों का लगता है wrong number लगा है, जमीन उन के बाप की नही, हमारे बाप की है. मुंबई के लोग कोई दुश्‍मन नही है हमारे. हमारे ही भाई बहन है. उन को पानी कम पडता हो तो हम से दोस्‍ती में कहे. लात मारकर भगा देने की विस्‍थापन की भाषा तो भाई भाई के बीच शोभा नही देती. हमारी जमीन और उनका पैसा ऐसी साझेदारी भी तो हो सकती है. बांध के मालिक हम बनेंगे, मुंबई को पानी उचित दाम में बेचेंगे. वैसे भी चितले समिती ने कह दिया है water is an economic good और महाराष्‍ट्र जल‍संपदा नियमन प्राधिकरण भी बैठा है पानी के मालिकाना हक बेचने के लिए. जब धंदा ही करना है, तो हम भी करेंगे. फटे अधूरे कपडे पहना यह समाज मुठ्ठीभर अनाज पर जी कर पहाड फोड सकता है, नदिया को बहा सकता है, और मुंबई जैसी लक्ष्‍मीकन्‍या को चुनौती भी दे सकता है. इसी सिंह साहस का यह सम्‍मान है. आप ने सुना होगा कि वयम् आदिवासी वनवासी क्षेत्र में काम करती है. सच है कि हमने शुरुआत वहां से की है, क्‍यों की हिंमतवाले लोगों के बीच ऐसे काम करना आसान होता है. लेकिन वयम् के ध्‍येय में किसी क्षेत्र की या समाज विशेष की मर्यादा नही है. हमारे चिपलून के कार्यकर्ता संदीप पवार भी आज यहां है, वहां कोई आदिवासी जनजाति नही है. उन के गांव में बौध्‍द है, कुणबी है, ब्राह्मण है – सारे इस काम में उन के साथ है. अपने गांव की ग्रामसभा को प्रभावी बनाने में यह जुटे हैं. हमारे चारकोप के कार्यकर्ता सदानंद खानोलकर यहां है – अपने वार्ड में अॅडव्‍हान्‍स्‍ड लोकॅलिटी मॅनेजमेंट कमिटी बनाकर महानगरपालिका से अच्‍छे काम करवा रहे हैं. हमारी पुणे हिंजवडी की कार्यकर्ता संजीवनी महाजन है. बिना कोई मोर्चा या बैनरबाजी किए हिंजवडी के ट्रॅफिक की समस्‍या संजीवनी ने सुलझाई है. वयम् का मंत्र कहीं भी चल जाता है, बस् मंत्र का प्रयोग करने वालेका जनतंत्र में विश्‍वास होना चाहिए. हमारा ध्‍येयवाक्‍य है – अपने विकास का अपना अभियान. जिस को भी लगता है विकास अपना है, अपने हाथों से अपने विचार से विकास हो, उन सब का यह अभियान है. रामदास स्‍वामी के शब्‍दों में थोडा बदल कर हमारी शर्त इतनी ही है, सामर्थ्‍य आहे चळवळीचे जो जो करील तयाचे परंतु तेथे लोकशाहीचे अधिष्‍ठान पाहिजे. हमारा जनतंत्र ही हमारा मूलाधार है. डा. आंबेडकर ने संविधान को देश के सम्मुख रखते हुए कहा था – अब तो सत्‍याग्रह करने की भी आवश्‍यकता नही होनी चाहिए, क्‍यूंकी अब हम ही हमारे कानून बनाएंगे, कानून से ही सब की हितरक्षा होनी चाहिए. वयम् की गंगधार यहीं से शुरू होती है. हमारे पिढी का भाग्‍य है पिछले कई वर्षों में ऐसे कानून बने हैं जो वास्‍तव में जनतंत्र को मजबूत कर रहे हैं. उंगली पर स्‍याही लगाकर सेल्‍फी निकालना – इतना मर्यादित जनतंत्र अब नही है. सूचना अधिकार कानून है, दफ्तर देरी कानून है, ग्राहक रक्षा कानून है, पंचायत राज है, ऐसे कई हैं – जो एक सामान्‍य नागरिक को बल देते हैं और शासन को उत्‍तरदायी, जवाबदेही बनाते हैं. Responsible people and responsive government (अर्थात् जागृत नागरिक और जवाबदेह सरकार) इसी को लोकशाही कहते हैं. शुरू शुरू में लोग हमें पूछते थे, आप लोग कानून के आधार पर काम करते हो, आप में से वकील कौन है? कोई नही है. थोडे कम पढे लिखे, और वह भी मराठी मीडियम में, जिन को अपने तहसिल से बाहर की दुनिया बहुत कम मालूम है – ऐसे सामान्‍य लोग भी जब कानून का प्रयोग कर सकते हैं – तो आप सब क्‍यों नही? देश में कानून का राज होने की अपेक्षा अगर हम करते हैं, तो फिर कानून को सामान्‍य जनता से दूर रखकर कैसे चलेगा? कानून को सब ने समझना चाहिए. दुसरी बात जनतंत्र बॅलन्‍स से चलता है. किसी एक के हाथ में बहुत अधिक सत्‍ता केंद्रीत हो, तो जनतंत्र खतरे में आ जाता है. सत्‍ता विकेंद्रीत हो और एकदुसरे पर नियंत्रण हो तो जनतंत्र ठीक से चलता है. इसी लिए वयम् का आग्रह रहता है कि ग्रामसभा सशक्‍त हो, महानगरों मे वार्ड सभा सशक्‍त हो. लोग प्रश्‍न पूछने के आदी हो, शासन जवाब देने की आदत डालें. हम बचपन में गीत गाते थे, ‘समन्‍वयाने नम्रपणाने विद्रोहाला शमवूया’. हम इसी को प्रत्‍यक्ष में लाने की कोशिश करते हैं. रोजगार गारंटी का काम लेने में, RTI से जानकारी निकालने में, सोशल ऑडिट का आग्रह करने में – कई बार शासकीय अधिकारीओं से संघर्ष के प्रसंग आते हैं. हमारी कोशिश यह रहती है कि उनका व्‍यक्तिगत अपमान हम से ना हो. हम हमारी बात न छोडें, लेकिन सभ्‍यता भी न छोडें. धीरे धीरे अधिकारीओं से मित्रता का भाव बढें. हमारे कुछ नए कार्यकर्ता बडे चाव से अपने घर वालों बताते हैं, पहले जो हमारी ओर मूंह उठाकर देखते भी न थे, वही तहसिलदार अब ‘आईए बैठिए’ कहते हैं. हमारा उसूल है, हम किसी को साहब नही कहते. हम मानते हैं कि साहब तो 1947 में देश छोडकर गए हैं. अब भी किसी को लगता है, कि वो साहब है तो जाने के दरवाजे खुले है. अब कोई साहब नही है, हम सब बराबरी के हैं, भाईबहन हैं, तो फिर किसीसे दबना डरना क्‍यों? हम शासन के अधिकारीओं को भी भाऊ, दादा, या जी लगाकर संबोधित करते हैं. छोटी सी बात है, लेकिन जनतंत्र के लिए आवश्‍यक बॅलन्‍स की शुरूआत कर देती है. हमने जलकुंड का प्रयोग किया, हमारे जिला परिषद के तब के सीइओ ने पुरी शासन यंत्रणा में उस का प्रचार किया. यहां तक की, नरेगा कमिशनर इसे शासन की योजना बनाएं इस लिए भी उनका प्रयास रहा. हमने वन व्‍यवस्‍थापन में लोकसहभाग के कुछ अच्‍छे प्रयोग किए, वनविभाग के अनेक बडे अधिकारीओं ने हमारे प्रसार में मदद की है. अभी एक बडी कॉपोरेट बँक को CSR में जंगल बढाने के लिए कोई प्रॉजेक्‍ट करना था, उन्‍हे वनविभाग ने वयम् की शिफारिश की है. 40हजार पेड लगाने का वृक्षवल्‍ली सोयरीक अभियान अब शुरू हो गया है. नरेगा में जनसहभाग से नियोजन का आयपीपीई कार्यक्रम अभी शासन चला रहा है. विक्रमगड व जव्‍हार दोनों तहसिलदार तथा बीडीओ ने वयम् के कार्यकर्ताओं को उस मे resource person के रूप में निमंत्रित किया है. यह सारे उदाहरण हम इसलिए बताते हैं कि जनतंत्र में बॅलन्‍स – जनता व शासन दोनों के लिए लाभदायक होता है.
परमात्‍म तत्‍व का अंश हम सब में है. यह सारे अंश मिलाकर ही खलनिर्दालन करने वाले का पूर्णवतार हो सकता है. ‘वयम्’ का अर्थ है हम सब.  भगवान सर्वव्यापी है, लेकिन उन्हे समझने के लिए किसी पत्थर पर सिंदूर थापते है. वैसा ही पत्थर बनने का मॊका मेरे शरीर को मिला है, निमित्त बनने का भाग्य मिला है. लेकिन वयम् का भाव हम सब में हैं. पुरस्कार हम सब का है.
धन्यवाद.

– मिलिंद Milind
Organizer, Vayam (वयम् – आपल्या विकासाची आपली चळवळ)
Jawhar, Dist. Palghar | Phones: +91.8879.330.774 and +91.9421.564.3301 34

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Better nutrition despite drought

The rainfall is low this year. The impending drought is bringing up many challenges. Vayam’s tribal villages face the possibility of rise in malnutrition. Vegetables crop is down and the market prices are shooting up. Many tribal families with meagre resources will not be able to buy vegetables and will simply give up eating vegetables. 

Vayam has come up with a solution with the participation of tribal families and urban donors. The tribal villagers are digging pits (4 cubic meters). A thick plastic sheet will be laid inside this pit. This pit or ‘Jalkund’ will store about 3,500 liters of rainwater. Sufficient to irrigate vegetables for the family for next 8-10 months. People will stitch teak-leaf and bamboo covers to cover this Jalkund and prevent evaporation. 

Vayam is soliciting donations Rupees One Thousand (1,500) per Jalkund. See ‘donate’ page on this blog for details of sending donations.

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1500 tribal citizens celebrating Democracy

October 1: Jawhar (Dist. Thane)
DSC_0819About 1,500 tribal citizens gathered in the tribal town of Jawhar to celebrate Lokshahi Vijay Yatra (Democracy victory) and danced through the streets of the town to the tunes of traditional tribal instruments like Tarpa, Dhol, and Toor. This event was organized by Vayam movement to celebrate the victory in getting information about Forest Rights claims. 1,274 citizens had participated in the RTI Satyagraha organized to bring transparency in the implementation of Forest Rights Act. This event was unique with a big number of tribal people expressing their faith in democracy.
The implementation of Forest Rights Act began in 2008, however tribal farmers are yet to get the ownership of ancestral lands that are in Forest Department possession since British times. Jawhar, Vikramgad, and Dahanu tehsils in Thane district have a huge number of complaints by tribal tillers that they were given only a fraction of ownership thus keeping them deprived of the actual land they have been holding. The additional collector’s office at Jawhar and the Sub-Divisional Officer did not give any information despite 1274 citizens filing RTI applications in April. The case later went to the State Chief Information Commissioner who gave a verdict in favour of the citizens. The SCIC ordered immediate disclosure of information through letters, website, and through Gram Panchayat notice boards. The SCIC also ordered that all tribal claimants throughout the state should be given this information. The tribal villagers participating in the Vayam movement saw this as a victory of democracy. They proclaimed their happiness by the traditional expression of dance.
DSC_0846The Lokshahi Vijay Yatra received a tremendous response from villagers and ten new villages also joined the movement. Vayam’s leading local activists Prakash Baraf and Anil Lohar addressed the mass at the end of Yatra. Mr. Baraf read out the information he had received. He said the Forest Department has filled their forms without making any field visits and the SDLC (Sub-Divisional Level Committee) and the DLC (District Level Committee) had filled their verification reports without informing the claimant. He showed blank reports signed by the committees. Mr. Lohar told the people that the committees had people’s representatives who have blindly signed such reports. He appealed to the people to go and check the representatives’ actions and ‘make them do their job’. Vayam’s organizer Milind Thatte appealed to all villages that they must file community rights claims and conserve the forest for present and future generations. Such claims are already filed by four of Vayam’s villages and they have prepared Biodiversity Registers. All four villages were recently awarded funds by the State Biodiversity Boards for conservation of biodiversity.

RTI Satyagraha ends victorious!

Vayam’s village volunteers have scored a massive victory in making our democracy work. The RTI Satyagraha that was launched in April by 700 tribal citizens has finally succeeded. These citizens were seeking a vital piece of information that the government was expected to give proactively. The government (i.e. Committee headed by District collector) defied the people by giving irrelevant answers and pressurizing the appellants during RTI hearing. People wanted to know why their rights to ancestral land were denied despite the law being in their favour. The first RTI applications were filed by 1272 people. 457 followed up rigorously and filed the first appeal. When the first appeal didn’t deliver, village assemblies met and decided to send 10 representative appeals to the State Chief Information Commissioner (SCIC). People contributed money for traveling of these 10 representatives.
The SCIC heard the appellants and gave a verdict that all 1272 people must be given the information they had sought. The PIO (public information officer) of the concerned offices were given show-cause notices; i.e. they have to explain why they couldn’t give information; failing which they will be fined heavily. The PIO was also ordered to pay Rs. 2,000 each to all 10 appellants as compensation for making them file appeals.
We thank Shailesh Gandhi, ex-CIC and RTI activist for his phenomenal role. Cheers to Vayam! Cheers to Democracy!

We thank our friends in media for a good coverage:

the Hindu: Tribal people use RTI for info on land titles, MoneyLife: RTI battle of Jawhar tribals get a fillip, the DNA: Put forest land info on website for tribals, the Times of India: Tribals to get info through RTI, the Mumbai Mirror: Finally, Thane tribals to get info about land titles, Lokmat: आदिवासींनीही वापरला आरटीआय, वयममुळे मिळाला न्‍याय, and Loksatta for appropriate publicity to this success of democratic struggle.

माहिती अधिकार सत्‍याग्रह – पुन्‍हा एकदा धडकणार!

वयम् च्‍या कार्यकर्त्‍यांनी गावोगावी कायदा आणि अधिकारांविषयी आदिवासी नागरिकांना सजग केले आहे. यातून झालेल्‍या जनजागरणामुळे एकाच दिवशी जव्‍हार आणि विक्रमगड तालुक्‍यातल्‍या एकूण पंधरा गावांमधल्‍या सातशेहून अधिक नागरिकांनी माहिती अधिकाराखाली स्‍वतः कसत असलेल्‍या जमिनीविषयी माहिती मागण्‍याचा अभूतपूर्व सत्याग्रह केला. (वर्तमानपत्रांनी प्रसिध्‍दी देऊन या नागरिकांचे बळ वाढवले. बातम्‍या लिंकः महाराष्‍ट्र टाईम्‍स, लोकसत्‍ता, द हिंदू) विधानसभेतही याविषयी सरकारला प्रश्‍न विचारण्‍यात आला. 

पण सरकारने या सर्व नागरिकांना गुळमुळीत उत्‍तरे पाठवली आहेत. लोक पुन्‍हा आंदोलनाच्‍या तयारीत आहेत. साक्षर, निमसाक्षर, निरक्षर अशा सर्वच आदिवासी नागरिकांनी कायद्याची मशाल उचलली आहे. नोकरशाहीला लोकशाहीचा दणका बसणार आहे. 

वंदे मातरम्.  

 

Volunteers invited to work/play with children

our kidsVayam is beginning a children’s activity at a tribal village Kogda-Patilpada (10 km north of Jawhar, 145 km from Mumbai, 90 km from Nashik). This activity is nicknamed as “Bin Booka Ya  Shika” (come, let’s learn without books). We are inviting young volunteers to participate and conduct activities with children. Volunteers between 17 to 25 years of age are most welcome. Prior experience of working with children and a special skill e.g. Origami, clay work, rope mallakhamb, gynamstics, story-telling, dramatics, field sports, making toys and tools etc. would be a great advantage. If you love to be with children, you are fit for this.

binbukayashika logo
That’s our logo 🙂

Copy-paste the following text in a word file. Fill the blanks and mail it to us.

वयम्

Volunteer enrollment form

Name:

Date of Birth:

Education:

(Note: mention year passed if you are a college student)

Postal address:

City:                                       PIN:

Email id:

Mobile no.: +91

Mobile number of a family member: +91

Family member’s name and your relation:

Information about medical fitness

History of recent or current illnesses:

Physical disability, if any:

 

Write a few lines (max. 100 words) about each of the following points:

Your experience of working/playing with children (age 6 to 12)

Why do you want to volunteer

Any prior experience of living in a village

What would you like to teach or facilitate

Any special skill or liking; e.g.  Origami, clay work,  storytelling, Rope mallakhamb, gymnastics, sport,  etc.

This volunteering opportunity is open for volunteers (17 to 25 yr old) willing to live at our residence in the village Kogda-Patilpada (140 km from Mumbai, 90 km from Nashik) for minimum 4 days (inclu. 3 nights) to a maximum of 8 days (inclu. 7 nights).

Kindly fill this form and mail it to: vayamindia@gmail.com

Novel Satyagraha by tribal citizens: 600 RTI applications in a day

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Jawhar, 8th April

Tribal citizens from Jawhar Taluka of Thane district have recorded their protest and demanded rightful information in an unprecedented manner filing RTI applications at the Additional Collector’s office at Jawhar. 687 tribal citizens have filed such applications today seeking information on their claims for rights over traditional land holdings under the FRA (Forest rights Act).  It is likely that more people will find similar applications in the coming days. This is an individual Satyagraha using modern legal tools.

Background:

Forest Rights Act implementation began in January 2008. Village forest rights committees (FRC) were formed and people filed their claims with these committees. The committees verified the claims by spot visits and measurements. The Gramsabhas finally approved (or rejected) these claims. The claims were then forwarded to Sub-Divisional Level Committee (SDLC) and then to District Level Committee (DLC) presided by the District Collectors. The SDLC and DLC were expected to clear the claims within 60 days each. But the tribal claimants have received their Patta (land title) only after five years. After this long wait of 5 years, people are still distraught and shocked at what the government has given on paper.

Many claimants in Jawhar and other tribal areas of the state have received a Patta that shows much lesser area of land than what the farmer is actually tilling and has claimed as a right. There are cases where the claimant had attached evidence and a verification report by FRC showing 5 to 6 acres of land holding, however the government Patta has shown only half or single acre. The government has not explained to the claimant why this unjust allocation was done.

The Satyagraha:

The people decided to file RTI application giving reference of the Forest Rights Act – Amended Rules of September 2012 and to the ‘proactive disclosure’ section of RTI. The Rules of 2012 and RTI (Sec. 4) both require that government proactively discloses to the claimant why an adverse decision was taken. More than 600 citizens from 12 villages from Jawhar and 3 villages of Vikramgad have filed RTI applications in a single day at the Upper Jilhadhikari office at Jawhar. Village wise numbers are: Anantnagar 72, Dhadhri 93, Wehelpada 153, Dohyachapada 33, Akre 39, Hateri 66, Kokanpada 47, Ozar 45, Sawarkhind 50, Palshin 6, Dapti 68, and Kayri 15.

This individual Satyagraha by tribals of Jawhar is likely to continue throughout this week.  It is reported that over 50 citizens have filed the RTI applications on the second day. Vayam has trained the people in use of RTI and FRA. And the people have resolved to assert their democratic rights.

Link to news published in Maharashtra Times: अधिकाराची क्रांती

Link to news published in The Hindu: Tribals resort to RTI fight